जीवन है संग्राम अगर तो...

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जीवन है संग्राम अगर तो, डर जाने से क्या होगा ?

ज़िन्दा रहकर लड़ना है, मर जाने से क्या होगा ?

इम्तिहान तो देने होंगे, क़दम क़दम पर दुनिया में, 

कोशिश करते जाओ हरदम, घबराने से क्या होगा ?

अगर हौसला क़ायम है तो, मंज़िल मिलती है इक दिन, 

हार के बाज़ी फिर निराश हो, घर जाने से क्या होगा ?

मीठी बोली से जब बिगड़े काम सभी बन जाते है ।

कैंची सी ज़बान चला फिर, शर्माने से क्या होगा ?

मिल कर सब आवाज उठाएं, गर हालात बदलना है तो...

एक अकेले इस तूती के, चिल्लाने से क्या होगा ?

जिसने पाला-पोसा उनकी, आंखों में गर आंसू हैं, 

दुनिया भर की चीजें हासिल, कर जाने से क्या होगा ?

मांझी के ही मत रहो भरोसे, खुद भी तैराकी सीखो,  

कश्ती में मझधार का पानी, भर जाने से क्या होगा ?

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