जीवन है संग्राम अगर तो, डर जाने से क्या होगा ?
ज़िन्दा रहकर लड़ना है, मर जाने से क्या होगा ?
इम्तिहान तो देने होंगे, क़दम क़दम पर दुनिया में,
कोशिश करते जाओ हरदम, घबराने से क्या होगा ?
अगर हौसला क़ायम है तो, मंज़िल मिलती है इक दिन,
हार के बाज़ी फिर निराश हो, घर जाने से क्या होगा ?
मीठी बोली से जब बिगड़े काम सभी बन जाते है ।
कैंची सी ज़बान चला फिर, शर्माने से क्या होगा ?
मिल कर सब आवाज उठाएं, गर हालात बदलना है तो...
एक अकेले इस तूती के, चिल्लाने से क्या होगा ?
जिसने पाला-पोसा उनकी, आंखों में गर आंसू हैं,
दुनिया भर की चीजें हासिल, कर जाने से क्या होगा ?
मांझी के ही मत रहो भरोसे, खुद भी तैराकी सीखो,
कश्ती में मझधार का पानी, भर जाने से क्या होगा ?
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