वरदान माँगूँगा नहीं...

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वरदान माँगूँगा नहीं...

यह हार एक विराम है, 

जीवन महा-संग्राम है ।

तिल-तिल मिटूँगा मैं पर...

दया की भीख लूँगा नहीं ।।

वरदान माँगूँगा नहीं...


स्मृति सुखद प्रहरों के लिए,

अपने खण्डहरों के लिए ।

यह जान लो मैं विश्व की 

सम्पत्ति चाहूँगा नहीं ।। 

वरदान माँगूँगा नहीं...


क्या हार में क्या जीत में,

किंचित नहीं भयभीत मैं ।

कर्तव्य पथ पर जो मिले...

यह भी सही वह भी सही ।।

वरदान माँगूँगा नहीं...


लघुता न अब मेरी छुओ,

तुम हो महान बने रहो । 

अपने हृदय की वेदना, 

मैं व्यर्थ त्यागूँगा नहीं ।।

वरदान माँगूँगा नहीं...


चाहे हृदय को ताप दो,

चाहे मुझे अभिश्राप दो ।

अब कुछ भी करो किन्तु,

कर्तव्य पथ से भागूँगा नहीं ।।

वरदान माँगूँगा नहीं...

* * *

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